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3 जनवरी— अमेरिका ने वेनेज़ुएला के खिलाफ एक बड़ा सैन्य हमला शुरू कर दिया है। इस दौरान अहम सैन्य और नागरिक ठिकानों पर कई बमबारी की गई है। अमेरिका के युद्धोन्मादी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के मुताबिक, इस हमले में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ़्तार कर लिया गया है।
यह कार्रवाई कैरिबियन क्षेत्र में पिछले कई महीनों से चल रही अमेरिकी सैन्य तैनाती का नतीजा है। इसका साफ़ मकसद है वेनेज़ुएला की सरकार को गिराना और उसकी जगह अमेरिका के इशारों पर चलने वाली सरकार बैठाना, ताकि देश के विशाल तेल संसाधनों को लूटा जा सके और पूरे लैटिन अमेरिका पर फिर से अमेरिकी दबदबा कायम किया जा सके।
दुनिया भर के मज़दूरों और उत्पीड़ित लोगों को अब साफ़ तौर पर अपना पक्ष चुनना होगा—अमेरिकी साम्राज्यवादी हमले के ख़िलाफ़ वेनेज़ुएला के साथ खड़ें! मादुरो को तुरंत रिहा करो!
वेनेज़ुएला के लोगों को अमेरिकी साम्राज्यवादी आक्रमण का हर संभव तरीके से जवाब देना होगा। मादुरो सरकार को लेकर किसी की भी राय जो भी हो, लेकिन अमेरिका के हाथों उसका तख़्तापलट पूरे लैटिन अमेरिका और वैश्विक दक्षिण के मज़दूरों, किसानों और मेहनतकश लोगों पर सीधा हमला है।
संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप या “अंतरराष्ट्रीय क़ानून” की दुहाई देना बेकार है। यह हमला एक बड़े अभियान की बस शुरुआत है, जिसका मकसद महाद्वीप में अमेरिकी प्रभुत्व के ख़िलाफ़ उठने वाली हर आवाज़ को कुचलना है। ज़रूरत है पूरे लैटिन अमेरिका में एक मज़बूत अमेरिका-विरोधी मोर्चा बनाने की, जिसमें वेनेज़ुएला को तुरंत सैन्य मदद दी जाए। इस मामले में चीन की विशेष ज़िम्मेदारी बनती है—वह हथियारों की आपूर्ति कर सकता है और अमेरिका पर भारी आर्थिक दबाव डाल सकता है।
दुनिया भर का मज़दूर वर्ग, जिसमें खुद अमेरिका के मज़दूर भी शामिल हैं, इस अमेरिकी आक्रामकता के ख़िलाफ़ संघर्ष में शामिल हो सकता है और होना भी चाहिए। अमेरिकी साम्राज्यवाद और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करो, जहाँ संभव हो हड़ताल करो! अमेरिकी हितों को पहुँचा कोई भी झटका वेनेज़ुएला के संघर्ष को मज़बूती देगा।
यह नया हमला एक बार फिर साबित करता है कि दुनिया में युद्ध और अस्थिरता का सबसे बड़ा स्रोत अमेरिकी साम्राज्यवाद है। जब कराकास पर अमेरिकी मिसाइलें गिर रही हैं, तब जो लोग चीन और रूस को भी अमेरिका जितना ही ख़तरा मानते हैं, उन्हें हक़ीक़त समझनी होगी। मज़दूरों और उत्पीड़ित लोगों की एकता तभी बन सकती है जब वे अपने असली दुश्मन—अमेरिकी साम्राज्यवादी वर्चस्व—का विरोध करें। वेनेज़ुएला के साथ एकजुटता! अमेरिकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!